Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 9: इंधन : हमारी जरुरत

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SubjectScience
Chapter9. इंधन : हमारी जरुरत
ClassEight
CategoryBihar Board Class 8 Solutions

Bihar Board Class 8 Science Solutions Chapter 9

इंधन : हमारी जरुरत

अभ्यास

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. ………… तथा ………. जीवाश्म ईंधन है।
  2. ……….. तथा ………… समाप्त नहीं होने वाले ईंधन के स्रोत हैं।
  3. कोलतार ………….. का उत्पाद है।
  4. पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों को पृथक् करने का प्रक्रम …….. कहलाता है।
  5. वाहनों के लिए सबसे कम प्रदूषक ईंधन ……….. है।

उत्तर-

  1. कोयला, पेट्रोलियम ।
  2. प्रकाश, वायु ।
  3. कोयला ।
  4. प्रभाजी आसवन विधि ।
  5. प्राकृतिक गैस ।

2. निम्नलिखित कथनों के सामने सत्य/असत्य लिखिए।

  1. जीवाश्म ईंधन प्रयोगशाला में बनाए जा सकते हैं।
  2. कोक, कार्बन का शुद्ध रूप है।
  3. पेट्रोल की अपेक्षा सीएनजी अधिक प्रदूषक ईंधन है।
  4. बरौनी में तेल का कुआँ है।
  5. कोलतार विभिन्न पदार्थों का मिश्रण है।

उतर-

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

प्रश्न 3. कोयला किस प्रकार बनता है?

उत्तर: कोयले का निर्माण एक दीर्घकालिक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे कार्बनीकरण कहा जाता है। यह प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

लाखों साल पहले, बाढ़, भूकंप आदि के कारण वनस्पतियां और वृक्ष मिट्टी के नीचे दब गए। धीरे-धीरे, इन दबे वनस्पतियों के ऊपर और अधिक मिट्टी और अवसादित चट्टानें जमती गईं। इन परतों के भारी दबाव और उच्च ताप के कारण, वनस्पतियों के अवशेष धीरे-धीरे कार्बनिक यौगिकों में बदलने लगे।

इस प्रक्रिया को कार्बनीकरण कहा जाता है, क्योंकि वायु की अनुपस्थिति और उच्च दबाव-ताप के कारण वनस्पतियों के कार्बनिक पदार्थ सिमट कर केवल कार्बन शेष रह गया। इस प्रकार पहले लिग्नाइट, फिर बिटुमिनस कोयला और अंत में अंगारा कोयला का निर्माण हुआ। कोयला मुख्य रूप से कार्बन से मिलकर बना है, इसलिए इसे जीवाश्म ईंधन भी कहा जाता है।

प्रश्न 4. जीवाश्म ईंधन समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन क्यों हैं?

उत्तर: जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आदि पृथ्वी के गर्भ में सीमित मात्रा में पाए जाते हैं। ये सभी ईंधन लाखों-करोड़ों साल पुराने मृत जीवों और वनस्पतियों से बने हैं। उनका निर्माण एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया है जो कि हजारों वर्षों में पूरी होती है।

लेकिन इन ईंधनों का उपभोग मानव द्वारा बहुत तेजी से किया जा रहा है, खासकर औद्योगिक विकास और बढ़ती आबादी के कारण। इसलिए पृथ्वी के अन्दर इनकी मात्रा धीरे-धीरे घटती जा रही है। इन ईंधनों को फिर से बनाने में लाखों साल लग सकते हैं, लेकिन हमारा उपभोग तेज गति से जारी है। यही वजह है कि जीवाश्म ईंधन समाप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधन हैं।

प्रश्न 5. ईंधन कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: ईंधन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा गया है:

  • उत्पत्ति के आधार पर: प्राथमिक ईंधन: ये प्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं जैसे लकड़ी, कोयला, क्रूड तेल/पेट्रोलियम आदि। द्वितीयक ईंधन: ये प्राथमिक ईंधन को प्रसंस्कृत करके बनाए जाते हैं, जैसे चारकोल, कोक, रसोई गैस (LPG), पेट्रोल, डीजल आदि।
  • भौतिक अवस्था के आधार पर: ठोस ईंधन: कोयला, लकड़ी, चारकोल आदि द्रव ईंधन: क्रूड तेल, पेट्रोल, डीजल आदि
  • गैसीय ईंधन: प्राकृतिक गैस, बायोगैस, LPG आदि

इन वर्गीकरणों के अलावा, ईंधनों को उनके स्रोत (जैविक या अजैविक) के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है।

प्रश्न 6. पेट्रोलियम निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।

उत्तर: पेट्रोलियम एक जीवाश्म ईंधन है जो लाखों साल पहले मरे हुए समुद्री जीवों से बना है। इसकी निर्माण प्रक्रिया इस प्रकार है:

समुद्र की तली पर मरे जीवों के अवशेष फैलते चले गए और अन्य अजैविक अवसादों के साथ मिल गए। धीरे-धीरे इन अवशेषों के ऊपर और अधिक अवसाद और मिट्टी की परतें जमती गईं। इन दबी हुई परतों पर भारी दबाव और उच्च ताप लग रहा था।

इन मरे जीवों के शरीर में मौजूद कार्बनिक पदार्थ वायु की अनुपस्थिति, उच्च दबाव और गर्मी के कारण धीरे-धीरे रासायनिक रूप से बदलते चले गए। लाखों-करोड़ों वर्षों में ये पूरी तरह से अपघटित होकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस में बदल गए।

इस प्रकार आज के पेट्रोलियम और गैस के भंडार वास्तव में करोड़ों साल पुराने समुद्री जीवों के अवशेषों से बने हैं।

प्रश्न 7. कोयला के विभिन्न उत्पादों के अभिलक्षणों एवं उपयोगों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: कोयले के प्रमुख उत्पाद और उनके अभिलक्षण एवं उपयोग इस प्रकार हैं:

  • कोक (Coke): जब कोयले को वायु की अनुपस्थिति में उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, तो एक कठोर, छिद्रित और काला पदार्थ बनता है जिसे कोक कहते हैं। यह मुख्य रूप से शुद्ध कार्बन से बना होता है। अभिलक्षण: कठोर, छिद्रित, काला उपयोग: इस्पात उद्योग में लौह अयस्क को गलाने के लिए, धातु निष्कर्षण प्रक्रियाओं में ईंधन के रूप में
  • कोल टार (Coal Tar): जब कोयले को परखनली में धीरे-धीरे गर्म किया जाता है तो एक गाढ़ा भूरा-काला द्रव प्राप्त होता है जिसे कोल टार कहते हैं। इसकी गंध अप्रिय होती है। अभिलक्षण: गाढ़ा भूरा-काला द्रव, अप्रिय गंध उपयोग: संश्लेषित रंग, औषधियां, विस्फोटक, इत्र, प्लास्टिक, पेंट और फोटोग्राफी सामग्री बनाने में
  • कोयला गैस: कोयले को उच्च तापमान पर गर्म करने से एक मिश्रित गैस प्राप्त होती है जिसे कोयला गैस कहा जाता है। यह मुख्य रूप से मीथेन, हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड गैसों से मिलकर बनी होती है। अभिलक्षण: गैसीय मिश्रण उपयोग: ईंधन और रसायन उद्योग में कच्चे माल के रूप में


प्रश्न 8. एलपीजी और सीएनजी का ईंधन के रूप में उपयोग करने से क्या लाभ हैं?

उत्तर: LPG (प्रवाहित पेट्रोलियम गैस) और CNG (압축된 प्राकृतिक गैस) जैसे गैसीय ईंधनों का उपयोग करने से कई लाभ होते हैं:

  • उच्च ऊष्मा मान: ये ईंधन परिपूर्ण दहन से अधिक ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
  • कम धुंआ: इनके जलने से कम धुंआ निकलता है, इसलिए वातावरण प्रदूषण कम होता है।
  • परिवहन ईंधन: पेट्रोल/डीजल की तुलना में ये वाहनों में अधिक कुशल और किफायती ईंधन हैं।
  • उच्च शुद्धता: इनके जलने से कम मलबा और कम हानिकारक उत्सर्जन होता है।
  • औद्योगिक उपयोग: प्राकृतिक गैस का उपयोग रसायन, पेट्रोरसायन और उर्वरक उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी किया जाता है।

प्रश्न 9. सूर्य के प्रकाश तथा वायु को ईंधन के रूप में उपयोग करने से क्या लाभ है?

उत्तर: सूर्य के प्रकाश (सौर ऊर्जा) और वायु (पवन ऊर्जा) जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने से कई लाभ होते हैं:

  • अनंत स्रोत: ये दोनों ऊर्जा स्रोत प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और समाप्त नहीं होते।
  • स्वच्छ ऊर्जा: इनके उपयोग से वातावरण प्रदूषण नहीं होता है।
  • जीवाश्म ईंधन की बचत: इनके उपयोग से सीमित जीवाश्म ईंधनों की बचत होती है।
  • लागत प्रभावी: धीरे-धीरे ये पारंपरिक ईंधनों की तुलना में सस्ते पड़ने लगेंगे।
  • स्थानीय स्रोत: ये दोनों हर जगह उपलब्ध होने से ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • पर्यावरण अनुकूल: इनका उपयोग पारंपरिक ईंधनों से कहीं ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल है।


प्रश्न 10. भारत में तेल क्षेत्र कहाँ-कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर: भारत में प्रमुख तेल क्षेत्र इन स्थानों पर स्थित हैं:

  • असम: दिगबॉई, मौरांगदिही, नहरकटिया, मोरान आदि
  • गुजरात: अंकलेश्वर, कालोल, वागरा आदि
  • मुंबई हाईः मुंबई के तट से लगभग 160 किमी दूर समुद्र तल में बसें तेल क्षेत्र
  • राजस्थान: बारमेर और जैसलमेर जिलों में
  • तमिलनाडु: अरियालूर और त्रिचिराpalली के निकट समुद्र तल में तेल क्षेत्र
  • आंध्र प्रदेश: मेहदीपटनम में समुद्री क्षेत्र

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